Haryana News: धान की फसल में बढ़ा बौनेपन रोग का प्रकोप! अनुसंधान केन्द्र ने जारी की वैज्ञानिक एडवाइजरी

Haryana News: धान की फसल में बौनापन (साउथर्न राइस ब्लैक-स्ट्रीकेड दवार्फ वायरस ) रोग के संभावित प्रकोप को देखते हुए हिसार के चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अधीन धान अनुसंधान केन्द्र, कौल (कैथल) द्वारा किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक एडवाइजरी जारी की गई है।
इस एडवाइजरी में किसानों को रोग की पहचान, संभावित कारण, वाहक कीट तथा रोकथाम के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई है, ताकि वे समय रहते उचित कदम उठा सकें और अपनी फसल को क्षति से बचा सकें। इस संबंध में जानकारी देते हुए उपनिदेशक कृषि डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि हाल ही में अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल एवं कैथल जिलों के कुछ किसानों द्वारा धान की फसल में पौधों के असामान्य बौनेपन की सूचना दी गई है।

क्षेत्रीय वैज्ञानिक निरीक्षण में यह पाया गया कि खेतों में कुछ स्थानों पर पौधे अत्यधिक छोटे रह गए हैं, उनकी पत्तियाँ गहरे हरे रंग की हैं, कल्ले नहीं बढ़ रहे हैं, और जड़ प्रणाली अविकसित है। साथ ही, सफेद पीठ वाला तेला, जो कि इस रोग का संभावित वाहक कीट है, भी कई स्थानों पर देखा गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह वायरस रेओविरिडे परिवार का डीएसआरएनए वायरस है और 2022 में भी इसी प्रकार के लक्षणों की पुष्टि हरियाणा में हो चुकी है।
रोग की रोकथाम हके लिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों में निरंतर निगरानी रखें और यदि कहीं बौने पौधे दिखाई दें, तो तुरंत कृषि वैज्ञानिकों या कृषि विभाग से संपर्क करें। प्रभावित पौधों को तुरंत उखाड़कर गड्ढों में दबा दें या नष्ट कर दें, ताकि रोग का प्रसार रोका जा सके। साथ ही, खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था, नालियों और मेड़ों की सफाई तथा अनावश्यक खरपतवारों को हटाने जैसे सांस्कृतिक उपाय अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि रोग वाहक कीटों के प्रबंधन के लिए नर्सरी या मुख्य खेत में सफेद पीठ वाले तेले (हॉपर) के नियंत्रण हेतु डायनोटीफ्यूरान 20 प्रतिशत एसजी (ओशीन या टोकन) 80 ग्राम प्रति एक? या पाइमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यू जी (चैस) 120 ग्राम प्रति एकड़ को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर दोहराव करें। साथ ही, किसान भाई लाइट ट्रैप का प्रयोग करें जिससे कीटों की उपस्थिति की जानकारी समय रहते मिल सके।
डॉ. गिरीश नागपाल ने जिला के किसानों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के संशय की स्थिति में तुरंत कृषि विभाग के विशेषज्ञों के पास परामर्श के लिए इन हेल्पलाइन नंबरों पर भी संपर्क कर सकते हैं 9416111775, 9468426462, 8059907772, 9897981827, 9416266339, 9813815656, 9466744080, 9813663855,9992487089, 9996858681, 972907393।